बुधवार, 20 अगस्त 2014

अखबार होना

हर रोज़ जीवन 
अखबार की तरह बदलता है 
कुछ नयी घटना 
कुछ वही पुरानी 
कुछ मिर्च-मसाला वाली चीज़े 
कुछ ख़बरें 
लिपटी आ जाती हैं कष्ट में 
कितना मुश्किल है 
अखबार होना 


आपपर चाही-अनचाही 
सारी  खबरों को लाद दिया जाता है !
यूँ तो हमसे कहीं ज्यादा दुःख 
पेपर को होता होगा 
हमतो एक बार पढ़ने के बाद छोड़ देते हैं उसे 
पर वो 
ज़िंदा रहता है 
सदियों तक 
उन्ही झूठी खबरों को 
अपने जिस्म से लिपटाये 
सदियों तक वो महज़ 
500 रुपये में 
एक कॉलम लिए घूमता रहता है 
गुमशुदा की तलाश 
या फिर 
उतने ही दाम में 
वो करता रहता है प्रचार 
अपनी पहली कीमत पर ही 
बाबा बंगाली 
कद बढ़ाएं या घटायें , वरना पैसे वापस पाएं 

कभी-कभी 
समोसे वाले थैले को 
फाड़ने के बाद 
जब उसमे से 
न्यूड सनी लेओनी की तस्वीर निकले , तो जाके 
ये पता चलता है की , 
समोसा इतना गर्म  क्यों है 

और वो बाघ -बकरी चाय 
जिसमे ये दोनों नाम ही 
एक दूसरे से डरते-मरते हैं 
इनका भी विज्ञापन 

और वो 
सबकी पसंद निरमा 
ऐश्वर्या के बाद 
कैटरीना का अधिकार वाला साबुन 
लक्स , ब्यूटी 

90 दिनों में सीखते फर्राटेदार इंग्लिश 
10  दिनों में , नंबर वन फिगर बनाना 
7 दिनों में गोरा करने वाली क्रीम 
वो बैंक वाले जो घर-घर लोन पहुंचाते हैं 
वो चाइना के मालो का सस्ता विज्ञापन 
पाइए एक पे दो फ्री 
और वो आराम से मिलती नौकरियां 
सोने पे सुहागा 
दसवी फेल तुरंत पाएं नौकरी 
वेतन 12 से 20 हज़ार 
वो कॉलेज 
जो बाटते हैं डिग्रियां 
घर बैठे 
उनके बाप का राज़ जो चल रहा होता है 
और वो एक सबसे डरावना लगता है जो 
सिंह राशि वाले  = आज लाल रंग का कपडा पहने , कुत्ते को जलेबी खिलाएं , दिन अच्छा जाएगा !
अबे साले 
सुबह 6 बजे अखबार पढ़ा है 
दिल्ली में दूकान नहीं खुलती 
सुबह जलेबी सिर्फ उत्तर प्रदेश में मिलती है 
डेल्ही में शाम को ! 
एक काम करो तुम  ही आ जाओ 
जलेबी खाने 
मैं घर पे बना लेता हूँ 
 

सच में कितना मुश्किल  है 
अखबार होना 

मनीष भारतीया 

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