गुरुवार, 14 अगस्त 2014

बॉर्डर होने का दुःख

आज पाकिस्तान की आज़ादी मुबारक हो ! 
रात 12 बजे के बाद हिन्दुस्तान की !

और वो सरहद क्या करे 
जो सदियों से भीग रही है 
मुस्लिम लहू और 
हिन्दू खून से !

क्या ये सरहद भी कभी आज़ादी का जश्न मना पायेगी 
या फिर 
ये जश्न 
सिर्फ-और-सिर्फ 
दो कौमो तक ही सिमट गया है 

किसी ने खींच दिया गुस्से में ये जल्ला 
कभी इसी जल्ले पे खेलते थे 
चिभ्भि  , गुल्ली-डण्डा , और लंगड़ी टांग !
पर अब इस जल्ले की सीमा बढ़ी है 
खेल के बदले 
होता है 
बिना पलक झपकाये 
एकटक निहारते रहने का खेल 
जल्ले की दोनों तरफ की टीम 
ऐसा ही करती है अब !!
manish bhartiya 

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