गुरुवार, 21 अगस्त 2014

सिगरेट

अभी तो बस जलाया है तुम्हे 
अभी सुलगना है 
तुम्हे काफी देर तक 
प्याले की चाय के बाद तक 
चलना है तुम्हे 
बस ऐसे ही 
और इतना ही 
हर रोज़ जलना है तुम्हे ! 

सुलग-सुलग के 
जो तुम्हारी ऐश गिरती है फर्श पे 
वो किसी की ज़िंदगी की ऐश हो सकती है 
या फिर 
ठंडी हवा का झोंका , समीर कहने वाली ऐश भी 
खैर छोड़ो 
तुम्हे तो जलना है 
आते ही फ़िल्टर को 
तुम छोड़ दोगी 
अपनी पूरी लालिमा 
और एक प्यासा 
जिसे सिर्फ एक पफ और चाहिए 
वो उदास होके 
खाली चाय पीके 
चल उठेगा 

अए सिगरेट 
तुम क्या किसी लक्ष्मी मइया से कम हो 
या तुम खुदको आलीशान बिल्डिंगों से कम समझती हो 
तुम ही तो हो 
जिससे भारत में भारतीयता बची है अभी 
गरीब हो या आमीर 
एक ही दूकान पे 
एक साथ खड़े मिलेंगे 
जो आज से पहले कभी भी न मिला हो 
वो दूकान पे गाडी से आता है 
सिगरेट लेता है 
जलाता है 
और जभी बगल में खड़े एक आदमी के हाथो में 
सिगरेट देख 
वो लाइटर जला के 
उसके मुह की तरफ बढ़ा देता है 
दोनों की सिगरेट जल चुकी है 

तुमही तो हो 
जो भारत -पाक को एक कर सकती हो 
मैंने सुना है 
तुम्हे लेने के बाद , आदमी सोचता बहुत है 

एक तुम्हारे ही लिए 
जब आवाज़ उठी 
की तुम अपने भाव बढ़ाने वाली हो 
साइकिल , स्कूटर , बीएम डब्लू 
सभी के मालिको के चेहरे उत्तर गए थे 
लेखक संघ 
त्राहि-त्राहि 
चिल्लाता हुआ भागा था 

अब सोचो ज़रा 
कितना प्यार है लोगो को तुमसे 
कभी-कभी गरीबी में 
तुम्हे बस एक ही ख़रीदा जाता है 
और चार दोस्त 
सामूहिक रूप से 
लगाते हैं तुम्हे अपने मुह से !
सोचो भला 
पत्नी से भी ज्यादा प्यार 
तुमसे 
हो जाता है दोस्तों को 

बरसात के दिनों में 
तुम्हारा ख्याल 
एकदम प्रेमिका की तरह ही तो रखा जाता है 
हाथो का छाता 
तुम्हारे जिस्म पर रख 
तुम्हे जेब में 
रख लिया जाता है 
ताकि तुम्हे जुखाम न हो 
और खुद 
छींकने लगते है 
फिर 
तुम्हारे पहले कश में 
धुआं नाको से निकाला जाता है 

तुम्हारा नाम भी तो कैसा-कैसा है 
छोटी - बड़ी गोल्ड फ्लैक 
कहते हुए , एक जीजा को अपनी सालियां याद आजायें,
छोटी और बड़ी 
रंगो का भेद तुमने ये बताया 
लाल और सफ़ेद 
और सालियों से मिलना 
क्लासिक रोज़ाना 
और प्यारी-प्यारी बातें कर लेने के बाद चाहिए 
मोर 
जब मन हो ज़रा सा वाइल्ड 
तो मिल जाए बस माइल्ड 

manish bhartiya 

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