आज खाने की जिद्द ना करो
आज खाने की जिद्द न करो !!
तुम ही सोचो ज़रा , कितना खाती हो तुम
क्यों न रोके तुम्हे , सब चबाती हो तुम
जान जाती है जब आर्डर देतीं हो तुम
तुमको मेन्यू कि है कसम
बात इतनी मेरी मान लो
आज खाने कि ज़िद्द न करो !!
पिज़्ज़ा और बर्गेर मे , ज़िंदगी है तेरी
चाट , टिक्की ,मोमोस भी लेके धरी
गोलगप्पे जो खाती हो तुम
मुह को कितना फुलाती हो तुम
आज खाने कि ज़िद्द न करो !!
जंग लगके यहाँ , जंक फ़ूड मिला
इससे सबको कमाई का मूँड़ मिला
गावं , शहर , और क्या कस्बा
सब ही चांटे हैं , धर-धर प्लेट
आज करवा न तू मुझको लेट
आज खाने कि ज़िद्द न करो
कम खाया कर यार , दिमाग तो खासतौर पे
मनीष भारतीया अल्ल्हाबादी
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