गुरुवार, 21 अगस्त 2014

लाज का पल्लू

जी जी जी 
आपही से कह रहा हूँ 
सुनिए तो ज़रा 
पल्लू से मुह मत ढकिये 
अच्छा नहीं लगता
 
क्या ? क्या कहा ?
ज़रा फिरसे कहना !
क्या नहीं अच्छा लगता !

जी आप गलत समझी 
मैं आपके मुँह की नहीं 
पल्लू के मुँह पे होने की बात कर रहा हूँ !

दिखाईये न 
अपनी बड़ी-बड़ी 
आँखें 
अपने पतले-पतले 
गुलाबी होंट !
क्या हुआ 
अगर कोई पुरुष तुम्हे घूरता है तो 
डरती क्यों हो 
उतार फेंको ये डर का चोला 
पहनो 
बेशर्मी का कपडा 
और निकल जाओ बाजार में 
सर खोलके 
घूरो तुमभी उस पुरुष को 
जो तुम्हे घूरता था 
और पास जाके कहो 
भाई साहब , चिकन कहाँ मिलता है 
बताएँगे क्या 
या फिर आप संग चलके दिलवा लाएं !
यकीं करो 
वो शर्म से लजा जाएगा 
तुम अपनी उस शर्म का पल्लू 
उसके चेहरे पे देख लोगी !

हटाओ न चेहरे से पल्लू 
क्यों छुपाये फिर रही हो 
अपनी सुंदरता तुम 
ऐसे 

मनीष भारतीया 

अखबार होना

हर रोज़ जीवन 
अखबार की तरह बदलता है 
कुछ नयी घटना 
कुछ वही पुरानी 
कुछ मिर्च-मसाला वाली चीज़े 
कुछ ख़बरें 
लिपटी आ जाती हैं कष्ट में 
कितना मुश्किल है 
अखबार होना 


आपपर चाही-अनचाही 
सारी  खबरों को लाद दिया जाता है !
यूँ तो हमसे कहीं ज्यादा दुःख 
पेपर को होता होगा 
हमतो एक बार पढ़ने के बाद छोड़ देते हैं उसे 
पर वो 
ज़िंदा रहता है 
सदियों तक 
उन्ही झूठी खबरों को 
अपने जिस्म से लिपटाये 
सदियों तक वो महज़ 
500 रुपये में 
एक कॉलम लिए घूमता रहता है 
गुमशुदा की तलाश 
या फिर 
उतने ही दाम में 
वो करता रहता है प्रचार 
अपनी पहली कीमत पर ही 
बाबा बंगाली 
कद बढ़ाएं या घटायें , वरना पैसे वापस पाएं 

कभी-कभी 
समोसे वाले थैले को 
फाड़ने के बाद 
जब उसमे से 
न्यूड सनी लेओनी की तस्वीर निकले , तो जाके 
ये पता चलता है की , 
समोसा इतना गर्म  क्यों है 

और वो बाघ -बकरी चाय 
जिसमे ये दोनों नाम ही 
एक दूसरे से डरते-मरते हैं 
इनका भी विज्ञापन 

और वो 
सबकी पसंद निरमा 
ऐश्वर्या के बाद 
कैटरीना का अधिकार वाला साबुन 
लक्स , ब्यूटी 

90 दिनों में सीखते फर्राटेदार इंग्लिश 
10  दिनों में , नंबर वन फिगर बनाना 
7 दिनों में गोरा करने वाली क्रीम 
वो बैंक वाले जो घर-घर लोन पहुंचाते हैं 
वो चाइना के मालो का सस्ता विज्ञापन 
पाइए एक पे दो फ्री 
और वो आराम से मिलती नौकरियां 
सोने पे सुहागा 
दसवी फेल तुरंत पाएं नौकरी 
वेतन 12 से 20 हज़ार 
वो कॉलेज 
जो बाटते हैं डिग्रियां 
घर बैठे 
उनके बाप का राज़ जो चल रहा होता है 
और वो एक सबसे डरावना लगता है जो 
सिंह राशि वाले  = आज लाल रंग का कपडा पहने , कुत्ते को जलेबी खिलाएं , दिन अच्छा जाएगा !
अबे साले 
सुबह 6 बजे अखबार पढ़ा है 
दिल्ली में दूकान नहीं खुलती 
सुबह जलेबी सिर्फ उत्तर प्रदेश में मिलती है 
डेल्ही में शाम को ! 
एक काम करो तुम  ही आ जाओ 
जलेबी खाने 
मैं घर पे बना लेता हूँ 
 

सच में कितना मुश्किल  है 
अखबार होना 

मनीष भारतीया 

सिगरेट

अभी तो बस जलाया है तुम्हे 
अभी सुलगना है 
तुम्हे काफी देर तक 
प्याले की चाय के बाद तक 
चलना है तुम्हे 
बस ऐसे ही 
और इतना ही 
हर रोज़ जलना है तुम्हे ! 

सुलग-सुलग के 
जो तुम्हारी ऐश गिरती है फर्श पे 
वो किसी की ज़िंदगी की ऐश हो सकती है 
या फिर 
ठंडी हवा का झोंका , समीर कहने वाली ऐश भी 
खैर छोड़ो 
तुम्हे तो जलना है 
आते ही फ़िल्टर को 
तुम छोड़ दोगी 
अपनी पूरी लालिमा 
और एक प्यासा 
जिसे सिर्फ एक पफ और चाहिए 
वो उदास होके 
खाली चाय पीके 
चल उठेगा 

अए सिगरेट 
तुम क्या किसी लक्ष्मी मइया से कम हो 
या तुम खुदको आलीशान बिल्डिंगों से कम समझती हो 
तुम ही तो हो 
जिससे भारत में भारतीयता बची है अभी 
गरीब हो या आमीर 
एक ही दूकान पे 
एक साथ खड़े मिलेंगे 
जो आज से पहले कभी भी न मिला हो 
वो दूकान पे गाडी से आता है 
सिगरेट लेता है 
जलाता है 
और जभी बगल में खड़े एक आदमी के हाथो में 
सिगरेट देख 
वो लाइटर जला के 
उसके मुह की तरफ बढ़ा देता है 
दोनों की सिगरेट जल चुकी है 

तुमही तो हो 
जो भारत -पाक को एक कर सकती हो 
मैंने सुना है 
तुम्हे लेने के बाद , आदमी सोचता बहुत है 

एक तुम्हारे ही लिए 
जब आवाज़ उठी 
की तुम अपने भाव बढ़ाने वाली हो 
साइकिल , स्कूटर , बीएम डब्लू 
सभी के मालिको के चेहरे उत्तर गए थे 
लेखक संघ 
त्राहि-त्राहि 
चिल्लाता हुआ भागा था 

अब सोचो ज़रा 
कितना प्यार है लोगो को तुमसे 
कभी-कभी गरीबी में 
तुम्हे बस एक ही ख़रीदा जाता है 
और चार दोस्त 
सामूहिक रूप से 
लगाते हैं तुम्हे अपने मुह से !
सोचो भला 
पत्नी से भी ज्यादा प्यार 
तुमसे 
हो जाता है दोस्तों को 

बरसात के दिनों में 
तुम्हारा ख्याल 
एकदम प्रेमिका की तरह ही तो रखा जाता है 
हाथो का छाता 
तुम्हारे जिस्म पर रख 
तुम्हे जेब में 
रख लिया जाता है 
ताकि तुम्हे जुखाम न हो 
और खुद 
छींकने लगते है 
फिर 
तुम्हारे पहले कश में 
धुआं नाको से निकाला जाता है 

तुम्हारा नाम भी तो कैसा-कैसा है 
छोटी - बड़ी गोल्ड फ्लैक 
कहते हुए , एक जीजा को अपनी सालियां याद आजायें,
छोटी और बड़ी 
रंगो का भेद तुमने ये बताया 
लाल और सफ़ेद 
और सालियों से मिलना 
क्लासिक रोज़ाना 
और प्यारी-प्यारी बातें कर लेने के बाद चाहिए 
मोर 
जब मन हो ज़रा सा वाइल्ड 
तो मिल जाए बस माइल्ड 

manish bhartiya 

बुधवार, 20 अगस्त 2014

अखबार होना

हर रोज़ जीवन 
अखबार की तरह बदलता है 
कुछ नयी घटना 
कुछ वही पुरानी 
कुछ मिर्च-मसाला वाली चीज़े 
कुछ ख़बरें 
लिपटी आ जाती हैं कष्ट में 
कितना मुश्किल है 
अखबार होना 


आपपर चाही-अनचाही 
सारी  खबरों को लाद दिया जाता है !
यूँ तो हमसे कहीं ज्यादा दुःख 
पेपर को होता होगा 
हमतो एक बार पढ़ने के बाद छोड़ देते हैं उसे 
पर वो 
ज़िंदा रहता है 
सदियों तक 
उन्ही झूठी खबरों को 
अपने जिस्म से लिपटाये 
सदियों तक वो महज़ 
500 रुपये में 
एक कॉलम लिए घूमता रहता है 
गुमशुदा की तलाश 
या फिर 
उतने ही दाम में 
वो करता रहता है प्रचार 
अपनी पहली कीमत पर ही 
बाबा बंगाली 
कद बढ़ाएं या घटायें , वरना पैसे वापस पाएं 

कभी-कभी 
समोसे वाले थैले को 
फाड़ने के बाद 
जब उसमे से 
न्यूड सनी लेओनी की तस्वीर निकले , तो जाके 
ये पता चलता है की , 
समोसा इतना गर्म  क्यों है 

और वो बाघ -बकरी चाय 
जिसमे ये दोनों नाम ही 
एक दूसरे से डरते-मरते हैं 
इनका भी विज्ञापन 

और वो 
सबकी पसंद निरमा 
ऐश्वर्या के बाद 
कैटरीना का अधिकार वाला साबुन 
लक्स , ब्यूटी 

90 दिनों में सीखते फर्राटेदार इंग्लिश 
10  दिनों में , नंबर वन फिगर बनाना 
7 दिनों में गोरा करने वाली क्रीम 
वो बैंक वाले जो घर-घर लोन पहुंचाते हैं 
वो चाइना के मालो का सस्ता विज्ञापन 
पाइए एक पे दो फ्री 
और वो आराम से मिलती नौकरियां 
सोने पे सुहागा 
दसवी फेल तुरंत पाएं नौकरी 
वेतन 12 से 20 हज़ार 
वो कॉलेज 
जो बाटते हैं डिग्रियां 
घर बैठे 
उनके बाप का राज़ जो चल रहा होता है 
और वो एक सबसे डरावना लगता है जो 
सिंह राशि वाले  = आज लाल रंग का कपडा पहने , कुत्ते को जलेबी खिलाएं , दिन अच्छा जाएगा !
अबे साले 
सुबह 6 बजे अखबार पढ़ा है 
दिल्ली में दूकान नहीं खुलती 
सुबह जलेबी सिर्फ उत्तर प्रदेश में मिलती है 
डेल्ही में शाम को ! 
एक काम करो तुम  ही आ जाओ 
जलेबी खाने 
मैं घर पे बना लेता हूँ 
 

सच में कितना मुश्किल  है 
अखबार होना 

मनीष भारतीया 

ख्याल आते हैं , चले जाते हैं : लाज का पल्लू

ख्याल आते हैं , चले जाते हैं : लाज का पल्लू: जी जी जी  आपही से कह रहा हूँ  सुनिए तो ज़रा  पल्लू से मुह मत ढकिये  अच्छा नहीं लगता   क्या ? क्या कहा ? ज़रा फिरसे कहना ! क्य...

लाज का पल्लू

जी जी जी 
आपही से कह रहा हूँ 
सुनिए तो ज़रा 
पल्लू से मुह मत ढकिये 
अच्छा नहीं लगता
 
क्या ? क्या कहा ?
ज़रा फिरसे कहना !
क्या नहीं अच्छा लगता !

जी आप गलत समझी 
मैं आपके मुँह की नहीं 
पल्लू के मुँह पे होने की बात कर रहा हूँ !

दिखाईये न 
अपनी बड़ी-बड़ी 
आँखें 
अपने पतले-पतले 
गुलाबी होंट !
क्या हुआ 
अगर कोई पुरुष तुम्हे घूरता है तो 
डरती क्यों हो 
उतार फेंको ये डर का चोला 
पहनो 
बेशर्मी का कपडा 
और निकल जाओ बाजार में 
सर खोलके 
घूरो तुमभी उस पुरुष को 
जो तुम्हे घूरता था 
और पास जाके कहो 
भाई साहब , चिकन कहाँ मिलता है 
बताएँगे क्या 
या फिर आप संग चलके दिलवा लाएं !
यकीं करो 
वो शर्म से लजा जाएगा 
तुम अपनी उस शर्म का पल्लू 
उसके चेहरे पे देख लोगी !

हटाओ न चेहरे से पल्लू 
क्यों छुपाये फिर रही हो 
अपनी सुंदरता तुम 
ऐसे 

मनीष भारतीया 

सोमवार, 18 अगस्त 2014

भांजियों के लिए

भांजियों के लिए

ले आया हूँ
बोस्की का पंचतंत्र
अपनी भांजियों के लिए !

पर उन्हें अभी देने से ज़रा घबराता हूँ
छोटी तो नहीं हैं वो अभी इतनी
की उन्हें किताब उपहार में न दी जा सके
पर दोनों बहुत शरारती हैं
जब आती हैं वो घर पे
तो मुझे बहुत सम्भालना पड़ता है अपनी किताबो को

पिछली बार
रच गयी वो
कितने पाकिस्तान के कई पन्नो पे
अपनी कारिस्तानियां
पॉलगोमरा का,,
 ही बचा है
स्कूटर पे एक लाल स्केच से
एक कार बना दी है
जो कार लगती तो नहीं
पर छोटीवाली से पूछो
तो वो ही बताती है !

रोल्ड डल्फ की कहानियो की किताब के
अठत्तरवें पेज पे
पेंसिल से
ए , बी , सी , डी लिख डाली है

झुम्पा लहरी की अनभयस्त धरती को
सच में
अनभयस्त कर दिया

मंटो को बना दिया कालजयी लेखक
उसके पहले पन्ने पे
टेढ़े-मेढ़े से लिखे
उनके छोटे हाथो से
लडखडाती हुई पेंसिल से लिखा
कालजयी पढ़ने के बाद
ये पता चल जाएगा !

आँख की किरकिरी के
दूसरे पन्ने पे बना
टेढ़-बाकुल आम
उनकी सबसे प्यारी कलाकारी है

निदा फ़ाज़ली के चेहरे पे
मूंछ बना देना
समरसेट माम की
चाँद और छः आने पे
एक नया चाँद बनाया है !

ब्राटिस्लावा की परायी बेटियां
मोहन राकेश के
आखरी चट्टान तक
नहीं जा पाती
बीच में इन्होने
कुछ पन्नो को
फाड़ दिया है !

आपका बंटी से
50 से 60 तक की संख्या के
पेज गायब हैं
कादंबरी दो
अपना मोटापा कम कर चुकी है

मिखाईल सोलोख़ोव के साहित्य
को
पानी में भिगा दिया था
गलती से बोतल गिर गयी थी पानी की !

मॉडर्न इंडियन थिएटर के
हर चैप्टर पे
कुछ नया लिखा है इन्होने !
द कोस्टा
डेवलपमेंट ड्रामा का
कवर अलग मिला था
मन-माटी
के दसवें पन्ने पे
रावण बना मिला
दस नारियाँ रविन्द्र जी के कहानी संग्रह में
जिसमे दस कहानिया थी
महज़ आठ ही मिली !
मंटो के रेडियो नाटक
मत पूछो

हाँ मैं लाया हूँ
बोस्की का पंचतंत्र
अपनी भांजियों के लिए
दूंगा उन्हें
पर कुछ दिनों बाद !

मनीष भारतीया