रविवार, 3 अगस्त 2014

ज़िद्द

आज खाने की जिद्द ना करो 
आज खाने की जिद्द न करो !!

तुम ही सोचो ज़रा , कितना खाती हो तुम 
क्यों न रोके तुम्हे , सब चबाती हो तुम 
जान जाती है जब आर्डर देतीं हो तुम 
तुमको मेन्यू कि है कसम
बात इतनी मेरी मान लो 
आज खाने कि ज़िद्द न करो !!

पिज़्ज़ा और बर्गेर मे , ज़िंदगी है तेरी 
चाट , टिक्की ,मोमोस भी लेके धरी 
गोलगप्पे जो खाती हो तुम 
मुह को कितना फुलाती हो तुम 
आज खाने कि ज़िद्द न करो !!

जंग लगके यहाँ  , जंक फ़ूड मिला 
इससे सबको कमाई का मूँड़ मिला 
गावं , शहर , और क्या कस्बा 
सब ही चांटे हैं , धर-धर प्लेट 
आज करवा न तू मुझको लेट 
आज खाने कि ज़िद्द न करो 

कम खाया कर यार , दिमाग तो खासतौर पे 

मनीष भारतीया अल्ल्हाबादी 

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